उम्र का मरहला(stage) नहीं छोड़ा,
ज़ीस्त(life) ने आईना नहीं छोड़ा।
मौत को देखना नहीं छोड़ा,
जान पे खेलना नहीं छोड़ा।
ऐसी तरक़ीब से लगी मुझमें,
आग ने रास्ता नहीं छोड़ा।
क़ाफ़िला ख़ुद मक़ाम होता है,
इसलिए क़ाफ़िला नहीं छोड़ा।
यूँहीं शोहरत मिली नहीं हमको,
घर की चौखट पे क्या नहीं छोड़ा।
हर मुनासिब दवा अता की है,
ज़ख़्म- ए- दिल को हरा नहीं छोड़ा।
दिल- ए- बेबस उदास हो जाता,
इसलिए फ़ासला नहीं छोड़ा।
उसने भी ख़ुदको रूबरू रक्खा,
मैंने भी देखना नहीं छोड़ा।
#અનન્ય