नए ज़माने के पोशाक भी बागी होने लगे हैं
तन ढकने से ज्यादा तन दिखाने लगे हैं
दोष ज़माने का या पोशाक को दें
दर्ज़ी या तहज़ीब या तालीम को दें
या मग़रिब से आये नफासत को दें
फर्क नहीं पड़ता पहनने वाले को बला से
ना देखना चाहें तो खुद ही आँखें बंद कर लें
= बाग़ी
#Rebellious