उनकी मजबूरियां समझे विना में क्यो में उग्र हो जाऊं,
बताये वो कुछ भी नही मुझे में उनकी आंखों को पढ़ पाऊ
बस इसे को प्रेम की सच्ची प्यार की परिभाषा कहलाती है
कि विन बोले उनके अधरों के फड़फड़ाने से समझ जाऊ।
*********कमलेश शर्मा "कमल"**सिंहोर म.प्र *****
#उग्र