जब मैं किसी और में खूबियाँ देखती हूँ,
तो मुझे अपनी कमियाँ उजागर होने लगती हैं।
और फिर में उन खूबियों पर इतनी मोहित हो जाती हूँ,
की भूल जाती हूँ.. की कहीं दुनिया के किसी कोने में,
कोई एक तो ऐसा होगा, जो ठीक वैसे ही मेरी खूबियों को देख अपनी खामियाँ जाँच रहा होगा और उतना ही मुझ पर भी मोहित हो रहा होगा।
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