# शांति
आज फिर उस बारिश की बूंद को देखा जिसका इंतजार हर बरस बडी़ बेसबरी से रहता है, आज फिर उस बूंद को छूआ जीससे मन को अपार शांति का अनुभव हुआ, फिर उस बूंद को महेसूस किया जीसका अहेसास होने के बाद मानो खुशी की वो लहरें मन में उठी की तन्हाइयों को बादलों का साथ मिल गया और में, इन ठंडी हवाओं में ही मुसकुराहटो के साथ तुम्हारा स्वागत करने को बेकरार हो उठी.... परंतु इस बेकरारी में भी मुझे परम शांति का अनुभव हो गया.....