शहर बनारस
हम त बनारसी हइं गुरु, काहे की
दुनिया में इक्के त शहर बनारस बा
घाट पर घूमल मंदिर में मत्था धूनल,
ईहे त बनावत एकरा पारस बा।
जहा बा महामना के बगिया क निर्माण भईल
उहवे ज्ञान आपन छटा पसारत बा
देश में त एकर बाते अलगे हउवॆ
दुनिया भी इकर अदा निहारत बा।
महामना बगिया में फूल खिला सब संसार के
माली हउवॆ गुरुजन तारक लोगे,
जहां हमेशा के आत्म में पहुंचाए खातिर,
संस्कृति सभ्यता के संवारत बा
इहे ता सभ्य बनारस बा।
जब ले लोगों के कष्ट का पता चले
उका पहिले तोड़ उकर जनता निसारत बा।
ई त विश्वनाथ के नगरी काशी हउवे
जहां तन मन में मजा विचारण बा।
केहू से परेशान भईल केहू त
सभ्यता से ओके सुधारत बा।
हरिया कहे खइके पान बनारस वाला
करिया कहे लंका के लस्सी सूपारस वाला
इहवे होत विश्व्रसिद्ध परिधान के निर्माण
लोग उके बनारसी साड़ी पुकरात बा
एक में भिन्न भिन्न में एक,
सबके दिल एकसाथ बखानत बा
ईहे शहर बनारस बा भईया
हां ईहे शहर बनारस बा,
जबले रहियां ई सब काशीवासी
तबले रही बनारस अविनाशी।।
।। हर हर महादेव ।।