अमानवीयता
इंसानियत मर चुकी है,
सरकारें वोट तौल रही हैं
अदालतें मूक है,
इन्हें अर्ज़ियाँ कौन दें
सब तो चमचे, कपटी, खास, भोगी में तब्दील हो चुके है
नैतिकता काफूर है
कोई अपील नहीं
कोई दया नहीं,
कोई करूणा नहीं
गर्द में डूब गए है अरमान
नष्ट हो चुकी हैं आत्मा
कराह रही है मानवीयता !
हम और आप सोच रहे है
हमें क्या
जब हमारा नंबर आएगा
तब देखेंगे!
✍©डॉ. साकेत सहाय
#KeralaElephantMurder