जानवर मुश्किलों में आ रहा है
इंसान जवान हुआ जा रहा है
समझदार है लोग तमाशा कर रहे
किसी का घर जला जा रहा है
बनाये है सड़के बिछाई पटरियां
इंसा वो घर पैदल लौटता जा रहा है
जमाने का दुख जमाना जाने
तू कौन हूं क्यों फिक्र कर रह है
तेरे पास आने को दिल कर रहा है
बेरहम कोरोना मुश्किल कर रहा है
डर मुझे कभी लगा नही हैवानों का
ये सर्दी जुखाम जीना हरम कर रहा है
छत पर लगाया है बिस्तर तुम्हरे लिए
बतमीज है बादल आसमां ढक रहा है
एक तेरे लिए नजरअंदाज किया सबको
क्या सोच के मेरे नजरो से छुपा जा रहा है
कैसी अजीब उलझन है ख़ामोसी है
तू बोलता नही तू बस सुनता जा रहा है