सब लड़ रहे हैं..
कुछ बोलकर लड़ रहे हैं,
कुछ बिन बोले लड़ रहे हैं,
कुछ अपनों के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ अपनों से लड़ रहे हैं,
कुछ घर के अन्दर लड़ रहे हैं,
कुछ मन में अन्दर लड़ रहे हैं,
कुछ देश के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ मजहब के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ सत्ता बचाने के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ सत्ता हथियाने के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ गरीबों के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ अमीरों के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ खेल के मैदान में लड़ रहे हैं,
कुछ जंग के मैदान में लड़ रहे हैं,
कुछ जीतने के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ हार में जश्न मनाने के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ जीने के लिए लड़ रहे हैं,
कुछ मारने के लिए लड़ रहे हैं।
कहीं भी चले जाओ इस दुनिया में,
मन शांत नहीं, तो जग शांत नहीं ।
~ प्रणव