माना कि खाखी नही मिली ,
न ही भर्ती ली फौज मे ही,
न बार्डर पर लड़ने ही गई,
न कोई काम किया ऐसा , भारत का नाम किया ऐसा |
लेकिन दिल की इस धड़कन मे , भारत माँ रक्त के ,
कण-कण मे | ऐसा न कभी दुर्दिन आये , यह पैर मेरे,
बाहर जायें | है गर्व मुझे इस धरती पर ,
इस पर ही मुझको दफनाये, या जले चिता इस धरती पर
मिट्टी मुझको यूँ अपनाये |