सदैव शरारती बनकर ही, बस तुमने मुझसे खेला है।
फिर भी मुझको नहीं भूलता,तेरी यादों का मेला है।।
थे कभी मिले हम पनघट पर, तो कभी मिले थे बागों में।
शरारती बातें हे प्रियतम, अब भी बसती हैं यादों में।।
हम बंधे प्रेम के बंधन में,सारी शरारतें भूल गये।
हार-जीत की डोर पकड़ ली,बस बिना विचारे झूल गये।।
सच कहते हैं जग में सारे,शरारत से प्रेम शुरू होता।
यह खुद पैदा होता उर में, कोई बीज नहीं है होता।।
#शरारती