जीवन में उमंगें लहराएं
खुशियों की बहारें छा जाएं
हरि हांथ में हो जीवन की डोर
तो सुख का सागर लहराए
इतिहास यही सिखलाता है
यदि कर्तव्य से अपना नाता है
मानव जीवन सब पाता है
यदि जड़ें हमारी गहरी हैं
तो धर्म हमारा प्रहरी है
जड़ से यदि हम दूर हुए
निज घमंड में मगरूर हुए
जीवन वसंत पतझड़ होगा
उर्वरा धरा बीहड़ होगा
मिट जाएगा जीवन उमंग
भटके है ज्यों कटी पतंग
स्वाभिमान बेनूर हुए
#पतंग