धीरे धीरे कमजोर बना जा रहा हूं,
तेरी इश्क़ के पहलू में नाकाम होता जा रहा हूं।
तू जितनी गुमराह करके जीती है खुद की जिंदगी,
उससे बढ़कर खुद को जिंदा दफनाया जा रहा हूं।
तूने जीते जी मौत के मशवरा बना दिए मेरे लिए
कश्म काश जिंदगी से में खुद पनाह दूंगा।
तू चाहे तो में हाथ की लकीरों को तेरे नाम रख दूं
मगर मेरी किस्मत को तो मिटा पाए ऐसा वक़्त ना आने दू।
❣️PYAR KA EK AHESHASH ❣️