जरा सोचिए
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हर बार अपने देश का विदेशों से तुलनात्मक अध्ययन मन को बैचेनी में डाल देता है।
विदेश को देश से बेहतर समझते है,
यह कैसी मानसिकता है?
जबकि महामारी के दौरान भारत का प्रदर्शन सभी देशों के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति दर्शाता है।
मानते हैं कि गिनती बढ़ी है लेकिन क्या उसके लिए मोदी जी जिम्मेदार है?
अगर सरकार सख्ती से कदम नही उठाती तो क्या आंकड़े और अधिक खतरनाक नही होते?
परिवार के चार सदस्य ईमानदारी से घर मे नही रह पाते ऐसे में मोदी जी पर करोङो को घर मे रखने की जिम्मेदारी थी।
शराब की खुली दुकानों ने महज राजस्व में बढ़ोतरी नही की अपितु निम्न वर्ग की पोल खोल कर रख दी।
जिनके पास खाने को पैसे नही थे वह 6 घण्टे तक एक बोतल के लिए गर्मी और महामारी की परवाह किये बिना खड़े रहे।
मुँह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा होने वाले यह बात नही समझ सकते मगर जो जमीन से उठे हैं, एक चाय की दुकान से सर्वोच्च पद पर पहुंचे हैं वह इन गरीबों की छोटी और बारीक बातों को बखूबी समझते हैं।
विनय...दिल से बस यूँ ही