मेरे मन विनोद भावो से भरा है,
मेरा बचपन आज भी मेरे अगन पड़ा है,
आओ सखियों थोड़ा स्वांग रचाए,
अपनी गुड़िया का फिर ब्याह कराए,
गुडिया का दूल्हा द्वारे पे खड़ा है।
मेरा मन.....
चिंकी पिंकी आज तुम जल्दी आओ,
अपने घर से दूर हमे जना है,
हलवा पूड़ी और खीर को खाओ,
फिर सुंदर फूलों को तोड़ ले आओ,
अपना बगीजा आज भी फूलों से भरा है
मेरा मन...
कजरी आज तुम क्यों ना आई,
तेरी सखियां आज तेरी बाट निहारे,
तेरे बापू ने हमे फिर रोका है।
मेरा मन....
आज मेरे मन एक सवाल हुआ है,
मेरे बचपन को किसने ले लिया
मा म्मता के लिए दिल रोता है
मेरा मन.....
#विनोदी