My Realistic Poem...!!!
यह माटी का है संसार
नादान खेल सके तो खेल
बाज़ी है तो रब के हाथ
पर पूरा विज्ञान भी है फेल
आज हर एक घर में है
अजीब-सा अपनोंका मेल
सोते चैन है किसी को
न जगते हूएँ है ताल-मेल
चार जीदगीं की चादरके
छेड़े न जूड़ते है न हैं मेल
चवन्नी जोड़ों तो अठन्नी
तूटे है कैसे है प्रभुके खेल
पापी मन के दाग आज
धूल रहे है,मनको है जेल
उड़ान रफ़्तार दौड़ सब है
वक़्त की जकड़ में रखेल
ढाँचे माटी के भूले हैं हस्ती
रबकी मर्ज़ीके आगे है फेल
नमाज़ आरती प्रार्थना भी
है बे-असर संसार है ख़लेल
बनते नहीं बनती बात भी
कोई अर्चनाकी हे रेलम छेल
प्रभुजी शरु तुमने ही किया
ख़त्म भी तुम्हीं करो ये
खेल बेबस लाचार बदहाल बंदे
लौट आए हैं शरण हो मेल
🙏🙏🏻•घर में रहे सुरक्षित रहे•🙏🙏
#Intrim