चाहे न मिल पाए ,
चाहे न दीदार हो,
वो तो इतना करीब हे ,
आँखे बंध करू और वो मेरे पास हो!
मसला वो नहीं!, के वो मेरे कितने करीब हे?
मामला वो हे की क्या हम भी उनके अज़ीज़ हे?
याद तोह वैसे उनको भी आते होंगे ,
पर क्या आँखे बंध करके वो मुझको पाते होंगे ?
हमारे तो दिन भी उनसे ,राते भी उनकी ,
बवाले भी उनसे ,बाते भी उनकी,
उसने ही नहीं किया हमें कभी खास ,
हमेशा हमें रखा सबके बाद,
बोलते हे ,इश्क़ विष्क सिर्फ हव्वा हे,
मेने कहा सारे मर्ज़ की ये दवा हे,
इसको इतना कम ना समझना
ये इश्क़ हे जनाब , इसे प्यार से समझना,
बेरुखी से यूँ, जाएगा नहीं,
ये इश्क़ हे, आसानी से आएगा नहीं ,.nidhi