बहुत लंबा है अभी सफ़र
कुछ देर तलक तो साथ रहो,
राह में है मुश्किलें बहुत
कुछ कदम तो साथ रहो...
जाने कितने आयेंगे मेहरो-माह
कुछ सहर तो साथ रहो,
ढूँढ रहा हूँ ख्वाब नख्ले-खुश्क-सहरा में
कुछ देर तो निगाहों के साथ रहो...
आयेंगीं अजनबी शहर की गलियाँ
सनम बन के मेरे साथ रहो,
न निभा सको तमाम उम्र का साथ
कुछ पल तो साथ रहो...
© रविश 'रवि'