#शिकार
शिकार में हूं
मेरे सपनों में ही मैं छुपा हूं
बेवजह एक मोड़ पर रुका हूं
आगे बढ़ने की जल्दी नहीं
तमाम उहापोह में
थिरकता मन
हाथ पर हाथ धरे
पर घात में हूं
कुछ ना करते हुए भी
विकार में हूं
न शेर हूं
न शिकारी हूं
फिर भी शिकार में हूं
-शिव सागर शाह "घायल"