Hindi Quote in Story by Kavita Verma

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दो महीने हो गये घर से बाहर निकले। आज पतिदेव ने कहा चलो गाड़ी से एक चक्कर लगा आएं। पहले तो मना किया फिर सोचा यह एकरसता तोड़ना भी जरूरी है क्योंकि मैं तो सब्जी सामान लेने भी बाहर नहीं गई। खैर गाड़ी से ही जाना है और कहीं उतरना है नहीं तो बस कंघी करके एक दुपट्टा लेकर बैठ गये गाड़ी में।
रिंग रोड़ सुनसान पड़ा था बीच-बीच में चौराहे पर पुलिस मुस्तैद थी दोपहिया चार पहिया गाड़ियों की चेकिंग चल रही थी। काफी दूर आ गये तो सोचा चलो एक बार मम्मी पापा को भी देख आएं। हालाँकि उन्हें सामान वगैरह देने पतिदेव जाते रहते हैं फोन पर बातचीत भी हो जाती है लेकिन रूबरू देखना अलग ही बात है।
घर के थोड़े पहले ही गाड़ी रोकी मैंने चेहरे पर दुपट्टा बांध लिया और उतर गई। मम्मी पापा बाहर पोर्च में झूले पर बैठे थे मैंने बाउंड्री वाल की जाली से झांक कर कहा हैप्पी मदर्स डे। मम्मी ने कहा थैंक्यू।
दुपट्टा बंधा था स्कर्ट कुर्ती पहनी थी और दुपट्टे के कारण आवाज भी थोड़ी अलग आ रही थी इसलिए मम्मी ने पहचाना नहीं। मैंने पूछा आप कैसी हैं? तबियत वगैरह सब ठीक है? बोलीं हाँ सब बढ़िया है।
मैंने कहा घर में सामान सब्जी फलफूल दवाइयाँ सब हैं?
हाँ हाँ सब हैं।
और किसी चीज की कोई तकलीफ तो नहीं है?
नहीं नहीं कोई तकलीफ नहीं है।
तब तक पापाजी उठ कर आ गये पूछने लगे आप कहाँ से?
मैंने कहा पहले मैं यहीं रहती थी आजकल तुलसी नगर में रहती हूँ।
दोनों थोड़ा अचकचाए फिर मम्मी बोलीं अरे ये तो कविता है। गेट का ताला खोला सेनेटाइजर से हाथ साफ किये दो कुर्सी बाहर लगाईं वहीं बैठ कर दस पंद्रह मिनट बात की पानी पिया और वापस आ गये।

#happy_mothers_day

Hindi Story by Kavita Verma : 111429580
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