Hindi Quote in Poem by kirandeep kour

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किस मोड़ पर लाकर खड़ा किआ 

न भला किआ न बुरा किआ 

अंजाम नहीं बदलना था तो 

रास्ता क्यों बदल दिआ | 

क्या खता रही, क्या गुनाह किआ 

अपना नहीं बनाना था 

तो अपनों को क्यों रस्ते मे  खड़ा किआ | 

नहीं जानती भविष्य क्या बनाओगे 

क्या लेकर वर्तमान से 

क्या मुझसे लौटाओगे 

अगर यही हश्र होना था 

तो क्यों आँखो मे अश्र दिआ |


किस मोड़...


अल्फाज़ सुना सकती नहीं ,

दिल खोल कर दिखा सकती नहीं 

अपनी इस हार का जशन मना सकती नहीं 

गैरों से क्या शिकवा करू, जब अपनों को जता सकती नहीं | 


उलझनें हमेशा उलझाये रखती है 

हर दफ़ा मुझे सताये रखती है 

शिकवा तो बहुत किआ है इनसे 

पर आखिर 

पर आखिर 

ये ही तो है अकेली, जो साथ हर दम निभाए रखती है| 


चलो सुलहा करती हूँ खुद से,

नहीं इस बात को दोहराऊंगी 

कहदो एक दफा ये तुम मुझसे,

नहीं लौट कर आऊँगी | 


तब समां बड़ा सुहाना होगा 

किसी का न गम और न किसी का बहाना होगा 

पहचान नई खुद की खुद से कराउंगी 

और 

और....... 

वक़्त के रास्ते पर चलते, आखिरकार अपने बजूद को पा जाउंगी |

  

 - किरन  

#Kavyotsav2

Hindi Poem by kirandeep kour : 111429468
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