( माँ को समर्पित कुछ पंक्तियां )
माँ ...
माँ जानती है
सब राज़ मेरे
फिर भी वो उठाती है
सब नाज़ मेरे
वो जान जाती है
जब भी मैं उदास होता हूँ
रहूँ चाहे कितना भी दूर
पर मन तो सदा उसके पास होता है
भीतर उसके चाहे हो
कितनी ही उथल पुथल
पर चेहरा माँ का शीतल-शांत
मीठी मुस्कान भरा होता है
हर मुफलिसी में भी
अन्नपूर्णा सा
माँ का हाथ
आशीर्वाद भरा होता है
कुछ भी तो
छुप पाता नहीं उससे
मन का हर अक्षर पढ़
मेरी पूरी किताब जान लेती है माँ
सवेरे स्वप्निल आंखों का उजियारा बन
उठा जाती है माँ
और रात को मीठी सी लोरी बन
सुला जाती है माँ
ख्व़ाब मेरे पूरे करने को माँ
जागती रहती है -
अपनी आंखों में बटोरे
वो मेरे सपने सभी
कुछ भी नहीं मांगती है माँ
बस देना ही तो जानती है माँ
इतने हिस्सों में बांट कर भी अपने को
सभी को पूरी मिल जाती है माँ
:- भुवन पांडे