महाभारत न पढ़नी चाहिए न घर में रखनी चाहिए
कोरोना लॉकडाउन के कारण जीवन थमा हुआ है. जनरूचि का ध्यान रखते हुए दूरदर्शन ने अपने पुराने लोकप्रिय धारावहिकों का पुनः प्रसारण कर रहा है. रामायण का प्रसारण सम्पूर्ण हो गया है. महाभारत का प्रसारण अभी चल रहा है. सभी को इस कथा में कितनी रूचि है इसका अनुमान धारावाहिक के प्रत्येक भाग के प्रसारण के पश्चात होने वाली सोशल मीडिया चर्चा से सहज ही हो जाता है. इतना रुचिकर और ज्ञानवर्धक होने के पश्चात भी हम में से अधिकांश ने इसे कभी पढ़ा क्यों नहीं, ये हमारे घर पर है क्यों नहीं? और तो और मानव मात्र को निष्काम कर्म और आत्मा की अमरता का बोध कराने वाली गीता भी हम में अधिकांश ने कभी पूरी नहीं पढ़ी. मुझे आश्चर्य होता है ये देखकर, आपको भी हो ही रहा होगा.
इस विषय में जो तनिक-अधिक समझ पा रही हूँ लगता है ये कहीं न कहीं हमें हमारे गौरवशाली इतिहास और ज्ञान से दूर रखने के बड़े षडयंत्र का एक छोटा सा अंश है. उत्तर भारत के कई प्रान्तों में मैंने लोगों को यह कहते हुए सुना है, महाभारत न पढ़नी चाहिए न घर में रखनी चाहिए अन्यथा घर में महाभारत होती है और परिवार नष्ट हो जाता है. ये मिथ्या प्रचार कब,किसने और किस कारण से किया होगा इसका पता लगाना अब दुष्कर है. यह निश्चित है कि यह हमें हमारे पारंपरिक और उज्जवल ज्ञान से विमुख करने के प्रयासों का ही अंग था.
यदि श्रीमद्भागवत गीता की बात करें जो विश्व में कर्मयोग और आत्मा की अमरता के ज्ञान का अनूठा ग्रन्थ है उसे मानो उपहास का ग्रन्थ बना दिया गया है. हम चलचित्रों में अपराधियों को गीता पर हाथ रखकर झूठी शपथ लेते देखते हैं या फिर शमशान में लिखा हुआ, “तुम क्या लेकर आए थे क्या लेकर जाओगे?” पारस्परिक चर्चा में भी प्रायः इन वाक्यों का प्रयोग उपहासात्मक या व्यंग्यात्मक रूप से होता दिखता है. जिस उपदेश ने विषाद ग्रस्त अर्जुन से गांडीव उठवा दिया वो लोग अपनी युवा संतान को पढ़ने नहीं देते, उन्हें लगता है ये कोई आयु है गीता पढ़ने की? सन्यासी बनना है क्या? कौन समझाएगा, गीता जीवन से दूर जाना नहीं सिखाती, जीवन से पलायन नहीं सिखाती, जीवन से जूझना सिखाती है.
इतना ही नहीं वामपंथ से प्रभावित कुछ लोगों ने तो ज्ञान –विज्ञान के उच्चतम शिखर वाले उस कालखंड को अंधा युग तक कह डाला. आधुनिक नारीवादसे प्रेरित लेखक-लेखिकाओं ने महिला पात्रों की कहानियों और उनके व्यक्तित्व को आधा अधूरा जानकार अनावश्यक और अभद्र टिप्पणियां तक कर डालीं.
समय है ज्ञान के इस महाकोश को पुनः खोलने का. विश्वास मानिये इसे घर में रखने से या पढ़ने से घर में कोई महाभारत नहीं होगी. गीता प्रेस ने इसे प्रकाशित किया है. खरीदें घर में रखें और पढ़े. गीता पढ्ने से आपको जीवन जीने का मार्ग और प्रेरणा मिलेगी. आप जीवन से कभी नहीं भागेंगे. अपनी युवा संतानों को इसे समझने दीजिये.