आज से तकरिबन 13 साल पेहले मेरे नानाजी का निधन हुआ था, ये उस समय कि बात है जब बुज़ुर्गो की तसवीर भी शायद इस ही हेतु से खीची जाती थी के उन्के चल बसने के बाद दीवार पे फ़ोटो टांग सके...!
वेसे तो जादा कुछ यादें है नही मेरे पास अपने नानाजी कि, पर हाँ उनका ना रेहना एक खास याद बनके रहा है क्योंकि तभी मेने जाना था के किसी का ना रेहना क्या होता है, शरीर मे प्राणो का ना रेहना क्या होता है, मृत्यु क्या होता है !