तुम आदत बन गए हो इस दिल की ,
सुबह शाम दिन रात मधुर लय हर धड़कन की,
एक तुम्हारी आदत ने मेरी दुनिया बदल दी,
एक तुम्हारी आदत ने मेरी जिंदगी बदल दी,
सिर्फ पागलपन नहीं हैं ये,सिर्फ प्यार भी नहीं ,
तुम्हारी आदत है सबसे पहले मनमें कहीं,
मनकी गहरी इच्छा कहूँ या कहूँ इसे पूजा,
पर तुम्हारी आदत से अच्छा नहीं कुछ दूजा,
तुम्हारी आदत नहीं है केवल मेरी कविता कहानी,
ये आदत बन गई है अब मेरी दीवानगी,