बैसाख के बादल,
अच्छे नहीं लगते।
बैसाख के बादल,
अच्छे नहीं होते।।
बैसाख का धर्म है,
तपना, तपना और तपाना।
बैसाख को धर्मच्युत करते,
बादल अच्छे नहीं लगते।।
बैसाख के बादल,
चुरा सकते हैं
धरा के भीगने का सुख,
बैसाख के बादल,
चुरा सकते हैं,
खलिहान के भरे जाने का सुख।।
बैसाख के बादल,
अच्छे नहीं लगते।
बैसाख के बादल,
अच्छे नहीं होते।।
तपने और भीगने
का समय निश्चित है।
उस समय में,
तपना और भीगना,
धर्म है, धरती का।।
धरती को धर्म से भटकाते,
बादल अच्छे नहीं होते।
ये बैसाख के बादल,
सच्चे नहीं होते।
ये बैसाख के बादल,
अच्छे नहीं होते।।