Hindi Quote in Poem by Yasho Vardhan Ojha

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#Destiny

-:आम माफ़ी:-

आजकल,
खास कुछ नहीं करता।
सुबह उठ कर ज़रा,
घर को निखार लेता हूं,
अब उनको क्या उठाना,
कमरा खुद ही बुहार लेता हूं।
धूल तो है नहीं,
लेकिन, अगर ये कहती हैं,
थोड़ा सोफा भी झाड़ देता हूं।
साथ ने सब सिखा दिया है मुझे,
देख चेहरा, तूफ़ान ताड़ लेता हूं।

किचन से जैसे ही,
मिलता है हरा सिग्नल,
नहा धो कर,
चेहरा संवार लेता हूं।
और फिर,
खास कुछ नहीं करता।
पतली सी खिचड़ी,
और बैगन का भरता,
खा कर, अपनी थाली भी,
मांजने को नहीं धरता,
खुद से साफ करता हूं।

उठंग कर फिर, पलंग पर,
कहीं जल्दी,
कहीं थोड़ा ठहर कर,
मीडिया को चरता हूं।
मगर हां, सबसे पहले,
इन्हीं की पोस्ट को,
पसंद करता हूं।
यहां हर शै मुझे,
"गुलज़ार" जैसी लगती है,
तो उनका क्या करुं अब मैं,
एक छोड़ कर‌ "उनको",
मैं सबको माफ़ करता हूं।

---यशो वर्धन ओझा

Hindi Poem by Yasho Vardhan Ojha : 111416829
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