तेरे रुखसत होने से निकला आंसू सूखा भी नही
और तेरी यादों की जलन मिट ना पाई
चाहता तो बहुत था कि कह दूं खत में हालात - ए - दिल
पर कैसे लिख दू की तेरी याद बहुत आई
मुझे डर है जमाने भर के उन शुष्क जज्बातों का
जिन्हे परवाह भी नहीं हमारी मुलाकातों का
इस बार जब चांद आएगा रोक लूंगा रात होने से
और जब जाएगा तू बोल दूंगा पहले बात होने से
जगाकर तेरे दिल में सारे अरमां प्यार के
लगा दूंगा तेरे होंठों से पहले मोहब्ब्त की प्यास होने से
#षणानन
#सूखा