जमातियों की तरह ईसाई मिशनरी भी अपने मज़हब को फैलाने की बहुत कोशिश करते हैं। लेकिन उन्होंने जो रास्ता अपनाया वो झूठ, फरेब, मक्कारी, और दग़ाबाज़ी पर आधारित है। उनका मक़सद ईसाइयों की संख्या बढ़ाने पर है जबकि जमातियों का मक़सद जो मुसलमान हैं उन्हीं की कमियों और कमज़ोरियों को दूर करके उन्हें इस्लाम का सच्चा फॉलोवर बनाना और इस्लाम के मुताबिक अपनी ज़िंदगी गुजारने पर ज़ोर देना है।
#जमातियों_पर_गर्व_है आज यह ट्रेंड ट्विटर पर छाया रहा।