प्यार तो एक सादगी है,और
प्यार वो सादगी है जो किसी भी श्रृंज श्रृंगार और कीमती लिबास की मोहताज नहीं है, क्योंकि
सादगी तो अपने आप में ही मुक्कमल है,और
जो मुक्कमल होता है,
उसे किसी की भी परिभाषा जरूरत नहीं होती है, क्योंकि
वो खुदा की ओर से मिला हुआ एक कीमती तौफा हैं,
जो हर किसी को नहीं मिलता और हर किसी के नसीब में भी नहीं होता।
नूर ए रमज़ान
नूर ए रमज़ान
🙏🙏🙏🙏🙏
केशर कुंज