क्यूं तुझे हिन्दु होने का गुमान है,
क्यूं मुझे मुसलमान होने का गुमान है
रब तुझ से तेरा भी नाराज़ है
रब मुझ से मेर भी नाराज़ है
कहीं खता तुने भी की है
कहीं गुनाह मैने भी किया है
इंसानियत को खोने की सज़ा शायद रब हमें दे रहा है
ना तुझे मंदिर में बुला रहा है
ना मुझे मस्जिद जाने दे रहा है......