आज रोज जैसी ए सुबह नहीं रही है,
तेरे बारे मे कुछ बोल पाए एसी जुबा नहीं रही है.
आज मेरी कलम तेरे बारे मे कुछ लिख नहीं रही है,
आज आंखे बंध करता हू तो तू दिख नहीं रही है.
आज तेरी कमी भी महसूस हो नहीं रही है,
लगता है तेरी यादे भी सूरज के साथ ढल रही है.
आज धड़कने भी तेरे बिना चल रही है,
आज मेरी जिंदगी तेरे मायने भूल रही है.