अब हालात जैसे तंग हो गये
तार पे लटका सा पतंग हो गये।
हवा कहे,ठुमका दे,द्वंद्व हो गया
दोर का तुटना युं बेढंग हो गया ।
बच्चेसी उम्मीदोका प्रसंग हो गई
कोशिशें झंडा लिये मलंग हो गई।
गांठ होंसलोकी बांधी,लहर हो गई
थोड़ी हवामें उंची ये पतंग हो गई।
खुला आकाश मिला दबंग हो गई
ईर्षालु दोरीयोमें पेचकी जंग हो गई ।
अमावस के तारे फिर बेरंग हो गये
देवांग कोइ जैसे कटीपतंग हो गये।।
सुबह की लिखावट का कुछ संपादन जीससे दो रचना बनेगी उसमें से एक...