My Painful Poems...!!!
माना पतझड़ भी हिस्सा है जीदगीं का
पर इन्सानी पत्ते झड़ेंगे सोचा सुना न था
माना बीमारी भी हिस्सा है जीदगीं का पर
इतनी कातिल बीमारी होगी सोचा न था
महज़ छींक भर से ही इतनी बड़ी संख्या
मृतकोंकी बढ़ जाएँगीं कभी सोचा न था
सेकेंडों हज़ारों नहीं लाखों की तादाद भी
कम प्रभु तेरा क्या राज़ है समझा न था
बख्श दे ख़ता जो भी जाने-अनजाने की है
इम्तिहान लेगा इतना कठिन सोचा न था
माना मानवीय मूल्यों का पतन हुआ है
पर प्रभु तुम तो दयालु दयाद्रष्टि कृपालु
इतने श्रापित भी हो जाओगे सोचा न था
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#Belong