जन्म अगर पुनः दिया प्रभु ने इस भारत मे ही लेना चाहुगा,
सोंधी-सोंधी इस देश की मिट्टी में घुटनो बल चलना चाहुगा,
जहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब मिल-जुल कर रहते है
छोटो को करते प्यार दुलार करते बड़ो को तवज्जो देते है
ऐसा हिंदुस्तान परिवार मेरा इसमें पलना-बढ़ना ही चाहुगा
गंगा-जमनी तहजीब के साये में फिर सुरझित में पाऊँगा ।
सारे जहाँ के लोगो ने मेरे देश की संस्कृति को अपनाया है,
धर्मनिर्पेक्झ पताका फिराकर विश्व गुरु बनने देश आया है, *************कमलेश शर्मा "कमल"*************
#जन्म