है यही ख्वाहिश कि, हर जनम में तू मेरा हो
इस गांव से दूर बहुत दूर अपना एक बसेरा हो
जहां खोल दो तुम, अपने मन के सारे पटो को
और जी उंठू मै मानकर तुम्हारी हसरतों को
भूल जाऊ तमाम दुनिया की रवायतों को
और तोड़ कर सारे जन्म मरण के बंधनों को
महकू फिर फिर तेरे शब्दों से बनी आयतों को
#जन्म