🐚🐚🐚🐚🐚🐚
कुछ विचार भ्रमित से लगे, लेकिन सच्चा उनका
आधार, भ्रमित नहीं सच्चाई को दर्शाते वही विचार,
ब्रह्मदत्त (जग जाती ना हार है,होती भ्रम-मन हार विकाएं..)
15 विचार सम तात् हैं 15 विचार गुण-नित ये समझाएं...
- तृष्णा मन जब तक ना हो, विचार विकाए फैलाएं...
शरीर मानकर हार.. करता है विश्राम, चंचल मन कभी ना थके दिन सुबह
और शाम...ब्रह्मदत्त ।
सभी दोस्तों मित्रों साथियों को ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ का नमस्कार आज
के कुछ अचूक नियम एवं विचार...
--स्त्री पुरुष इन नियमों का ।
ध्यान हमेशा रखें दुर्घटना से बचें।
प्रथम =घर से निकलते हुए व्यक्ति को पीछे से आवाज ना दे
द्वितीय -खाली बर्तन या अशुभ संकेत हो तो घर वापस आ जाएं
तृतीय =शनिवार दिन लोहा फ्री भी मिले तो कृपया घर लेकर ना आए।
चतुर्थ =घर से निकले हुए व्यक्ति से तेल और नमक लाने को ना कहें
पंचम=दिन मंगलवार बुधवार को पलंग खटिया ना खरीदें ।
षष्ठम =बेटी को तिथि दशमी को घर से दूसरे घर बिदा ना करें करें करें।
सप्तम= घर बनाते समय दक्षिण दिशा में द्वार ना करें वह दिशा अशुभ है।
अष्टम =मां बहन सफर में गीले वस्त्र पहनकर या रखकर सफर ना करें
नवम= बच्चे के साथ पगवान रखो तो एक चुटकी नमक एक चुटकी
कोयला रखें।
दशम= माता बहन बिना भजन संध्या घर में ताली ना बजाए बरकत भाग
जाती है।
ग्यारहवाँ= अग्नि जलाते ही अग्नि को प्रणाम करें क्योंकि हमें 1 दिन अग्नि
स्नान करना है।
बारवां =धर्म कर्तव्य मर्यादा का हमेशा ध्यान रखें
तेरहवाँ =बेवजह हंसना नहीं चाहिए क्योंकि वहां आपकी गृह हंसती है।
चौधवाँ= घर में ईश्वर की लिए एक दीपक रोज जलाना चाहिए।
पंद्रहवाँ =स्त्री को भोजन हमेशा खुश होकर बनाना चाहिए।
जैसा भोजन खाओगे वैसा ही शरीर पर प्रभाव पड़ता है।
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
🐚🐚🐚🐚🐚🐚