काश! तुम हमसे न मिले होते
तो हसीं ख्वाब इन आँखों में,न सजे होते
रह रहे होते बड़े बेफिक्र से आज
तुम्हारी फिक्र में ,यूँ न जल रहे होते
काश! तुम हमसे न मिले होते
तो खूबसूरत ख्वाब कोई भी
इस दिल ने न बुने होते
काश! कि तुमने दिल के तार
न झँझनाये होते तो
दिल की बेकरारी से ,हम दूर ही रहते
न समझ पाते कि क्या होता है
दिल का लगाना,न आंसुओं की
बरसात में यूँ नहाए होते
अल्हड़ सी,मस्त थी जिंदगी मेरी
न था इन आँखों में कोई सपना
न था कहने को कोई अपना
काश! कि मन की सूखी धरती पर
तुम प्रेम का सावन न बरसाए होते
मन के उपवन में प्रेम के फूल
न खिलाये होते
तो इस महक से
हम नहीं जल रहे होते
काश! कि तुम हमसे न मिले होते
तो हसी ख्वाब इन आंखों में
न सजे होते