#सा
सार की बात (हास्य-व्यंग्य)
----------------
इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर ने लेक्चर के प्रारंभ में कहा,
मेरे लेक्चर का 'सार' यह है कि आप स्टूडेंट्स क्लास ध्यान से अटेंड करेंगे तो एक रिविजन में आप विषय को
को अच्छी तरह से समझ लेंगे ।
आर्टस की प्रथम वर्ष की क्लास थी । परंतु संदीप का मन
गर्ल्स कालेज के सामने ध्यानस्थ था अंजलि कहीं निकल न गई हो । प्रोफेसर ने क्या पढ़ाया न सार समझ आया न मूल ।
संदीप और रघु ( रघुवीर ) ने एक्जाम के समय ज्योंईट स्टेडी ( एक साथ) तैयारी करने सारी रात एक साथ बैठे
परंतु रात भर की स्टैडी में प्लान किया की अंजलि का
जन्म दिन कैसे मनाना है । सुबह पेपर लिखते समय
दोनों सोचा और सोचने का सार ये निकला कि काश
'कुछ पढ़ लिया होता '।
-----------++-------
मेरे पड़ोस में शर्मा जी की 65वर्षीय माता जी मुहल्ले में
आये एक महात्मा जी द्वारा कथा के आयोजन में नित्य
जाती है उनके साथ मुहल्ले की और भी हम उम्र वृद्द
महिलाये उनके साथ जाती थी । कथा प्रवचन का समय
9बजे सुबह से प्रारंभ होती थी ये मातायें 8.30बजे
घर से निकल कर सबसे आगे बाबा जी के सामने और
साउंड बाक्स के पास बैठती थीं ताकि कथा अच्छे से सुन सकें।
मैंने पूछा -माता जी बाबा जी ने प्रवचन में क्या कहा ?
माता जी- पंडित जी बहुत अच्छी है और बहुत ज्ञानी है।
"नहीं वो तो मैं भी देख आया हूं मगर उन्होंने क्या
कहा आप तो सबसे आगे बैठती है । "
-महाराज जी ने बहुत अच्छी बात बताई हैं ।
मैं-वो ही अच्छी बात तो मैं जानना चाहता हूं कुछ ज्ञान
हमें भी मिले हम भी अच्छी बात जानें ।
माता जी- भैया बातें तो बहुत ज्ञान की करते हैं बाबा जी
मगर जे गुप्ताईन है न पूरे समय अपनी नई बहू की
बुराई बतात रहत है।
सार की बात यह है कि महात्मा जी की कथा तो बहाना है
शर्मा जी की माता जी और मुहल्ले की बुजुर्ग महिलायें
अपनी भड़ास निकालने वहां इकठ्ठी होती हैं ।