पहले सोचता था कि
ये विश्व
कितना विशाल है
कितना विस्तृत है
विशाल सागर, विशाल भूखंड
समेटे हैं जिसने अपने इस
विस्तार में, अपने आकार में
और ओढ़ रखा है ये
फैला सारा आकाश
पर एक अदृश्य सूक्ष्म रोगाणु ने
इस सारे विश्व को
छोटा, बहुत छोटा बना दिया है
उसने अपने अदृश्य विष पाश में
बांध लिया है पूरे विश्व को
और बौना बना दिया है
सारा वैश्विक विस्तार
अब नहीं विचार आते
मुझे इस वैश्विक विस्तार के !
अब तो मेरी सारी दुनिया
सिमट आई है मेरे छोटे से
घर के भीतर
और अब
मेरी सोच की ज़मीं
ये फर्श हो गया है और
घर की छत में सिमट
आया है मेरा सारा आसमान !
#विश्व