वो पल आज बहोत याद आते है,
जब उनकी चोट को महसूस करने के लिए खुद को चोट देते थे।।
होता जब दर्द उस जख्म पर,
तो उनकी हँसी को मरहम बना लेते थे।।
पल तो वो भी बहोत ख़ास थे,
जब उनको सोता देखने के लिए खुद की नींद भूल जाते थे।।
जब होता मायुस उनका चेहरा,
खुद की हँसी भूल जाते थे।
और आज सायद वही पल,
जिंदगी की जीने की एक वज़ह बन गए है।।