विश्व पटल की रज भूमी पर
दे, रहा संदेश, जय जय भारतदेश,
जय जय भारत देश.
भूल रहा था मानवता जो ,खेल रहा था खेल.
चारो खाने चित सबको कर, फिर भी कर आया मेल.
जय जय भारत देश,जय जय भारत देश
सिखला दी सबको एक नीती , धर्म की खींची, रेख.
जय जय भारतदेश जय जय भारतदेश.
ताकत के मद चूर हो रहे,सत्ता का दम भरते है.
दे आया संदेश उन्हे भी, दे आया संदेश.
जय जय भारतदेश जय जय भारतदेश.
आज उठा है अपनी रौ मे जैसे कोई शेर.
जय जय भारतदेश जय हो भारत देश.
समता और क्षमता की परिपाटी पर चलकर .
विश्व गुरू सा नेक .जय जय भारतदेश जय हो भारतदेश.
#विश्व