# kaavyotsav-२ हे मन ! तू अधीर न बन यह समय का हो रहा परिवर्तन, न रहा ख़ुशी का बोलबाला सदा न ही रहेगा गम, हे मन ! तू अधीर न बन |
मन के भय को दूर भागना है,
अवांछित बीमारी को डराना है
संक्रामकता पर विजयी होना है,
सुरक्षित वातावरण बनाना है | अपनों के लिए अपनों के पास, यही है सुरक्षा का एहसास, कठिन समय यू ही निकल जाएगा। सुख का सवेरा धूप खिलाएगा,। हे मन ! तू अधीर न बन |
आवश्यकता है एकजुटता की,
चिंतन की,सामंजस्य की
जाति,वर्ग,धर्म से ऊपर उठ जाना है
वैश्विक महामारी को दूर भगाना है
मानव हित को सर्वोपरि बनाना है |
हे मन ! तू अधीर न बन,
हे मन ! तू अधीर न बन |
पूजा शर्मा