न तू है,न मैं हुँ
न पहले जैसी बात है
हाथ मेरे कागज़ का टुकड़ा
मेरी उम्मीद बस मुलाक़ात है
तेरी खुशबू है मेरी सांस में
मेरी खुशबू में तेरी सांस है
सुबह आती नही,काटती मुझे ये रात है
मेरी उम्मीद बस मुलाक़ात है
न तारों में चमक है
न चाँद अब ख़ास है
तेरी याद मेरे ज़हन में,याद मुझे हर बात है
मेरी उम्मीद बस मुलाक़ात है
वक़्त के मोती गिरने लगे
शाम मेरी जब ढलने लगे,शमा बुझाने आ जाना,
खत्म होने चली मेरी ज़ात है
क्योंकि उम्मीद बस मुलाक़ात है
#मुलाक़ात