अनकहा आज कहने जा रहा हुँ।
दिल में छुपी सच्चाई बताने जा रहा हुँ।
कभी न की थी मोहब्बत तुमसे,
पुकारा नहीं कभी भी दिलसे,
सारी उम्र इस धोखे में था मगर
असलियत से परदा उठाने जा रहा हुँ।
दिल की बेवफाई जाहीर करने जा रहा हुँ।
शायद तुम इस भ्रम में जी रही थी।
बेवफाई परिसीमा देखने आ रही थी।
आता हुँ अब में करने खत्म खेल सारा।
तभी फुटेगा बेवफ़ाई का गुबारा।
न कुछ रहेगा तुम्हारा, न कुछ रहेगा हमारा।
अनकहा कहने हलका होगा दिल मेरा।
#अनकहा