खिलखिलाती धूप है
और चाँदनी रातें,
करो फिर प्यार की बातें,
करो फिर प्यार की बातें!
हवाएँ मंद मंद चलती,
पुष्प मकरंद की मस्ती,
सजन की याद ताज़ी है,
मचल उठती हैं जज्बातें!
करो फिर प्यार की बातें,
करो फिर प्यार की बातें!
सुबह से शाम अच्छी है,
पिया की याद सच्ची है,
बलम सीमा के हैं प्रहरी,
मधुर होगी मुलाक़ातें ,
करो फिर प्यार की बातें,
करो फिर प्यार की बातें !
मुक्तेश्वर