मेरा व्यक्तित्त्व एक हारा हुआ , दुःखी , चिंतायुक्त,अवसादों से घिरा हुआ है। मैं हर वक्त जिंदगी से मैं अपनी जिंदगी मांगता हूं क्योंकि कहीं न कहीं मैं खो चुका हूं खुद को , हर होने वाली घटना ऐसी प्रतीत होती है जैसे 'मैं' मैं नही ,मैं कहीं दूर खड़ा उसे देख रहा हूँ और यकीं नही कर रहा!.