शायद तुम भूल गयी होगी, एक शाम जब हम दोनों एक बगीचे में मिले थे, वो शाम हम दोनों कितने खुश थे। मुझे आज भी तुम्हारे वो चेहरे की चमक याद है जो उस वक़्त सूर्यास्त की रौशनी भी तेरा साथ दे रही थी और वो नटखट हवाओं को तो कभी माफ नही करूँगा, जो तुम्हारे चेहरे को छिपाने की कोशिश कर रही थी।