मे और मेरे अह्सास
घर को धर्मशाला बना दिया था l
ना जाने कहां कहां भटकता था l
जितनी मनुष्य को घर की जरूरत है l
उतनी ही घर को मनुष्य की जरूरत है l
अभी भी वक़्त है देर नहीं हुई है l
लौट कर घर चला जा,
जी ले जिंदगी अपने लिए, अपनों के साथ ll
२-४ - २०२०
दर्शिता.