तुम चाहो तो हसरत तबाह करलु,
बदलदो लहजा बंध निगाह करलु।
वैसे किहे चाहत रूह से तुम्हारी,
चाहो तो थोड़ी सी खताह करलु।
सुनो मेरी महोब्बत अभी नई नई है,
हां कहो तो एक बार गुनाह करलु।
यूँ दिल बचा के रखना अच्छा नही हे,
अगर कहो तुमपे जान फनाह करलु।
ऐसे डर डर के दुनिया जीने न देगी,
साथ दे दो तो जीना मकाम करलु।
अब बस तम्हारे खातिर ही जी रहा हूँ,
ना, हो तो कफ़न का इंतजाम करलु।
Dp,"प्रतिक"